मंगलवार, 29 मई 2012

कोरबो लोरबो जीतबो रे.... वाकई ममता बनर्जी और शाहरुख खान मे काफी समानता हैं सबसे पहले तो दोनों ही केकेआर के इस स्लोगन का अक्षरश: पालन करते हैं। लड़ने में दोनों माहिर हैं गलती करने के बाद मानते नहीं .. औऱ हां जीतना जानते हैं ममता को कांग्रेस से अलग हुए एक दशक हो गया है लेकिन बंगाल की गद्दी एक साल पहले ही मिली कितना संघर्ष संसद और सड़क पर ममता ने किया ये देश जानता है। सीपीएम से उसका गढ़ छीन लेना और वो भी इतने अंतर से ये ममता का ही माद्दा था। उधर बॉलीवुड के स्वयंभू बादशाह शाहरुख खान ने आईपीएल की फ्रेंचाइजी में पांच साल इनवेस्ट किया है। लगातार असफलता असफलता और असफलता के बाद आखिरकार बाजीगर के हाथ बाजी लग ही गई। शाहरुख खान ने इस दरमियान अपना और अपनी टीम का हौसला बढॉया ही येबात अलहदा है कि वो समय समय पर अपना आपा खोते रहे है लेकिन टीम पर कभी आपा नहीं खोया ... और आखिरकार किंग खान की केकेआऱ ने कोरबो लोरबो के बाद जीतबो रे का उनका सपनापूरा कर ही दिया। अब जब दो एक प्रकृति के लोग मिलते है तो जश्न तोहोगा भले ही सरकारी खर्चे पर हो अपनी बला से ...
दीदी बंगाल का और बंगालियों का मूड बखूबी जानती हैं मां माटी औऱ मानुष की बात करने वाली दीदी को पता है कि बंगाली जनता को कैसे भावुक किया जाता है .... नहीं तो आईपीएल टूर्नामेंट को जीतना कोई इतना गौरव का क्षण नहीं कि इतना बड़ा सम्मान समारोह रखा जाये लेकिन ममता बनर्जी जैसे कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती लेफ्ट बंगाल में आखिरी सासं ले रहा हैं रूढिवादिता की गहरी खोह में बैठे लेफ्ट नेताओं को शायद ये चांस याद भी नहीं होगा...लेकिन ममता ने जैसे कोलकाता वासियों को उनके उत्साह को व्यक्त करने का एक मौका देकर बाजी मार ली है। ... कुछ नहीं करना पड़ा हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा होए ... किराए के खिलाड़ियों और किराए के कोचों से सजी धजी विनर टीम को सरकारी खर्च पर सम्मान देना था नाम दे दिया कोलकाता म्युनिसपिल कारपोरेशन का सम्मान समारोह औरबुला लिया राज्यपाल बंगाल क्रिकेट एसोसियेशन को ... तमाम औपचारिकताओं को पूरा  करके ममता ने एक तरह से जता दिया कि बंगाल केगौरव को याद रखना औरउसे बरकरार रखना जैसे उनकी ही जिम्मेदारी है औऱ वे ये काम बखूबी करना जानती है।

सोमवार, 28 मई 2012

रनडाउन


रन डाउन ... बढ़ी मनमोहक बला है ये है तो रोमन शब्द लेकिन देवनागरी लिपि में लिखे इन दो शब्दों की महत्ता को हम आप तो क्या बच्चा भी जानता है कम से कम पहला शब्द मतलब रन तो हर कोई जानता है। बच्चा दो पैरों पर चलना सीख भी नहीं पाता कि हर बाप उसे सचिन की शक्ल में देखना शुरु कर देता है। बहरहाल रन अगर डाउन होनेलगे तो वो रनडाउन होने लगता है। जैसे हमारे जीवन में मूल्यों का पतन यानि डाउन हो रहा है कुछ वैसे ही ये रनडाउन .. ऊपर से नीचे गिरता है। ये रनडाउन .. कभी कभी तो ये इतना गिरता है कि संभालना मुश्किल हो जाता है विद्या बालन की डर्टी पिक्चर से भी ज्यादा डाउन हो जाता है। हालाकि कहा जाता है कि अंग्रेजी का रनडाउन काफी अच्छा होता है.. हूं होता होगा अपन को क्या ... अपन ठहरे हिंदी वाले ... अण्णा से शुरु होता है तो राखी पर और अगर ज्यादा डाउन हुआ तो पूनम पांडे तक गिरता चला जाता है।